Category Archives: सोचने को मजबूर करती कहानी

माँ की ममता

माँ की ममता का अदभुत उदाहरण जो आपकी आँखें नम कर देगा ।
“बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि पता नहीं क्यों मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया.”
कुछ समय पहले जापान में आये सुनामी के दौरान एक दिल को छू लेने वाली घटना हुई…
भूकंप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए घर की जांच कर रहा था. बारीक दरारों में से महिला का मृत शरीर दिखा, लेकिन वो एक अजीब अवस्था में था. महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी. ठीक वैसे ही जैसे मंदिर में लोग भगवान के सामने नमन करते है. उसके दोनों हाथ किसी चीज़ को पकडे हुए थे और भूकंप से उस महिला की पीठ और सर को काफी क्षति पहुंची थी.
काफी मेहनत के बाद दल के सदस्य ने बारीक दरारों में कुछ जगह बनाकर अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. बचाव दल को उम्मीद थी कि शायद महिला जिंदा हो, लेकिन महिला का शरीर ठंडा हो चूका था और बचाव दल समझ गया की महिला मर चुकी है.
बचाव दल उस घर को छोड़ दूसरे मकानों की ओर चल पड़ा. बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि, ‘पता नहीं क्यूँ मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया.’
उसके बाद बचाव दल एक बार फिर उस महिला के घर की तरफ पहुंचा. दल प्रमुख ने मलबे को सावधानी से हटा कर बारीक दरारों में से अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. महिला के शरीर के नीचे की जगह को हाथों से टटोलने लगा. तभी उनके मुंह से निकला, ‘बच्चा… यहाँ एक बच्चा है.’ 
अब पूरा दल काम में जुट गया. सावधानी से मलबा हटाया जाने लगा. तब उन्हें महिला के मृत शरीर के नीचे एक टोकरी में रेशमी कम्बल में लिपटा हुआ 3 माह का एक बच्चा मिला. दल को समझ में आ चुका था कि महिला ने अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने जीवन का त्याग किया है. 
भूकंप के दौरान जब घर गिरने वाला था तब उस महिला ने अपने शरीर से सुरक्षा देकर अपने बच्चे की रक्षा की थी. डॉक्टर भी जल्द ही वहां आ पहुंचे. दल ने जब बच्चे को उठाया तब बच्चा बेहोश था.
बचाव दल ने बच्चे का कम्बल हटाया तब उन्हें वहां एक मोबाइल मिला, जिसके स्क्रीन पर सन्देश लिखा था, ‘मेरे बच्चे अगर तुम बच गए तो बस इतना याद रखना कि तुम्हारी माँ तुमसे बहुत प्यार करती थी.’ 
मोबाइल बचाव दल में एक हाथ से दूसरे हाथ जाने लगा, सभी ने वो सन्देश पढ़ा, सबकी आँखें नम हो गयी…

ये सिर्फ एक माँ ही कर सकती है | अपने बच्चे को बचाने की खातिर अपने जीवन का बलिदान | इसिलिये ही तो माँ को धरती का भगवान माना गया है |
अगर इस कहानी ने आपके दिल को भी छुआ हो तो इसे दूसरों के साथ भी बांटें। 

–आप वही दे सकते हैं जो आपके पास है–

एक बार एक व्यक्ति ने एक नया मकान खरीदा..
उसमे फलों का बगीचा भी था..
मगर पडौस के मकान पुराने थे..और उनमे कई लोग रहते थे.
कुछ दिन बाद उसने देखा कि पडौस के मकान से किसी ने बाल्टी भर कूडा उसके घर दरवाजे पर डाल दिया है..
शाम को उस व्यक्ति ने एक बाल्टी ली उसमे ताजे फल रखे ..और उस घर के दरवाजे पर घंटी बजायी….
उस घर के लोग बेचैन हो गये.
और वो सोचने लगे कि वह उनसे सुबह की घटना के लिये लडने आया है..
अतः वे पहले ही तैयार हो गये और बुरा भला बोलने लगे..
मगर जैसे ही उन्होने दरवाजा खोला……वे हैरान हो गये…रसीले ताजे फलों की भरी बाल्टी के साथ…मुस्कान चेहरे पर लिये नया पडोसी सामने खडा था…
………सब हैरान थे……..

उसने कहा….जो मेरे पास था वही मैं आपके लिये ला सका…

सच है जिसके पास जो है वही वह दूसरे को दे सकता है…
जरा सोचिये…कि मेरे पास दूसरो के लिये क्या है….
………..

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प्यार बांटो प्यार मिलेगा,

खुशी बांटो खुशी मिलेगी…

सहनशीलता का महामंत्र

जापान के सम्राट यामातो का एक मंत्री था- ओ-चो-सान। उसका परिवार सौहार्द के लिए बड़ा मशहूर था। हालांकि उसके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, पर उनके बीच एकता का अटूट संबंध था। उसके सभी सदस्य साथ-साथ रहते और साथ ही खाना खाते थे। इस परिवार के किस्से दूर दूर तक फैल गए। ओ-चो-सान के परिवार के सौहार्द की बात यामातो के कानों तक भी पहुंच गई। सच की जांच करने के लिए एक दिन सम्राट स्वयं अपने इस बुजुर्ग मंत्री के घर तक आ पहुंचे।

स्वागत, सत्कार और शिष्टाचार की साधारण रस्में समाप्त हो जाने के बाद यामातो ने पूछा, ‘ओ-चो, मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की ढेरों कहानियां सुनी हैं। क्या आप बताएंगे कि एक हजार से भी अधिक सदस्यों वाले आपके परिवार में यह सौहार्द और स्नेह संबंध आखिर किस तरह बना हुआ है।’ ओ-चो-सान वृद्धावस्था के कारण ज्यादा देर तक बात नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपने पौत्र को संकेत से कलम-दवात और कागज लाने के लिए कहा। जब वह ये चीजें ले आया तो उसने अपने कांपते हाथ से करीबन सौ शब्द लिखकर वह कागज सम्राट को दे दिया।

सम्राट यामातो अपनी उत्सुकता न दबा पाया। उसने फौरन उस कागज को पढ़ना चाहा। देखते ही वह चकित रह गया। दरअसल, उस कागज पर एक ही शब्द को सौ बार लिखा गया था। और वह शब्द था- सहनशीलता। सम्राट को अवाक देख ओ-चो-सान ने कांपती हुई आवाज में कहा, ‘मेरे परिवार के सौहार्द का रहस्य बस इसी एक शब्द में निहित है। सहनशीलता का यह महामंत्र ही हमारे बीच एकता का धागा अब तक पिरोए हुए है। इस महामंत्र को जितनी बार दुहराया जाए, कम है।’

अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो ???

एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी, ऐ लड़के, इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में ? लड़के ने कहा, पच्चीस पैसे। सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में
देगा क्या ? यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। 

उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराया पर मौन रहा, जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा। महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे- पीछे गए। बोले : ऐ लड़के, ठहर जरा; यह तो बता तू हंसा क्यों ? वह लड़का बोला, महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास
तो लगी ही नहीं थी। वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे। महात्मा ने पूछा, लड़के ! तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया, महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता। वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है। फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं? पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना होती है, वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते। पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते |
अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर खुदा हे तो फिर फिक्र क्यों ??