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~~ बेटी की विदाई ~~

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चित्र गूगल से साभार

वो दिन जीवन में लाया खुशियाँ अनंत,
जब नन्ही सी बिटिया गोद में आई थी।

जन्नत मिल गई थी मानों मुझको जब,

अखियाँ मीचें इक कली मुस्काई थी।

हुई थोडी बडी तो घर भर दिया किलकारी से,
अपनी तुतलाती मीठी बोली से ढ़ेरों बातें बनाई थी।

परियों जैसी फ्रॅाक पहन वो कितनी इठलाई थी, 

खिलखिलाहट से फिर, घर-आँगन महकाई थी।

बीता बचपन नन्ही परी पर जवानी छाई थी,
हु बु हु दिखती वो मेरी ही तो परछाईं थी।

अब कठिन लम्हे आए जब करनी उसे पराई थी,
पत्थर दिल रहा होगा जिसने ये रीत बनाई थी।

थी जो माँ-बाप के कलेजे का टुकड़ा,
आज उसी की विदाई घड़ी आई थी।

धूमधाम से कर पाणिग्रहण संस्कार,
नम आँखों से देनी पड़ी विदाई थी।

बचपन से इस आँगन सींचा जिस पौध को,
आज फूल बन वो दूजे आँगन को महकाएगी।

दे ढ़ेरों दुआएँ शुभाशीष माँ-बाप ने उसे विदा किया,
इस घर-आँगन में अब उसकी यादें ही मुस्काई थी।

@ शशि शर्मा”खुशी”