Monthly Archives: October 2015

सहनशीलता का महामंत्र

जापान के सम्राट यामातो का एक मंत्री था- ओ-चो-सान। उसका परिवार सौहार्द के लिए बड़ा मशहूर था। हालांकि उसके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, पर उनके बीच एकता का अटूट संबंध था। उसके सभी सदस्य साथ-साथ रहते और साथ ही खाना खाते थे। इस परिवार के किस्से दूर दूर तक फैल गए। ओ-चो-सान के परिवार के सौहार्द की बात यामातो के कानों तक भी पहुंच गई। सच की जांच करने के लिए एक दिन सम्राट स्वयं अपने इस बुजुर्ग मंत्री के घर तक आ पहुंचे।

स्वागत, सत्कार और शिष्टाचार की साधारण रस्में समाप्त हो जाने के बाद यामातो ने पूछा, ‘ओ-चो, मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की ढेरों कहानियां सुनी हैं। क्या आप बताएंगे कि एक हजार से भी अधिक सदस्यों वाले आपके परिवार में यह सौहार्द और स्नेह संबंध आखिर किस तरह बना हुआ है।’ ओ-चो-सान वृद्धावस्था के कारण ज्यादा देर तक बात नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपने पौत्र को संकेत से कलम-दवात और कागज लाने के लिए कहा। जब वह ये चीजें ले आया तो उसने अपने कांपते हाथ से करीबन सौ शब्द लिखकर वह कागज सम्राट को दे दिया।

सम्राट यामातो अपनी उत्सुकता न दबा पाया। उसने फौरन उस कागज को पढ़ना चाहा। देखते ही वह चकित रह गया। दरअसल, उस कागज पर एक ही शब्द को सौ बार लिखा गया था। और वह शब्द था- सहनशीलता। सम्राट को अवाक देख ओ-चो-सान ने कांपती हुई आवाज में कहा, ‘मेरे परिवार के सौहार्द का रहस्य बस इसी एक शब्द में निहित है। सहनशीलता का यह महामंत्र ही हमारे बीच एकता का धागा अब तक पिरोए हुए है। इस महामंत्र को जितनी बार दुहराया जाए, कम है।’

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हल्‍दी वाला दूध पीने के 7 लाभ

हल्‍दी वाला दूध पीने के 7 लाभ
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बहुत फायदेमंद हैं हल्‍दी वाला दूध इन दोनों के एक साथ प्रयोग से चन्द्रमा और गुरु ग्रह भी मजबूत होता है। दूध जहां कैल्शियम से भरपूर होता है वहीं दूसरी तरफ हल्‍दी में एंटीबायोटिक होता है। दोनों ही आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। और अगर दोनों को एक साथ मिला लिया जाये तो इनके लाभ दोगुना हो जायेगें। आइए हल्‍दी वाले दूध के ऐसे फायदों को जानकर आप इसे पीने से खुद को रोक नहीं पायेगें ।

1.सांस संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
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हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। साथ ही यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है

2. मोटापा कम करें
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हल्दी वाले दूध को पीने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल और अन्‍य पोषक तत्व वजन घटाने में मदगार होते है।

3. हडि्डयों को मजबूत बनाये
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दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी वाला दूध पीने से हडि्डयां मजबूत होती है और साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस की समस्‍या में कमी आती है ।

4. खून साफ करें
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आयुर्वेदिक परम्‍परा में हल्‍दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह रक्त को पतला कर रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ करता है। और शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है।

5. पाचन संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
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हल्‍दी वाला दूध एक शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक होता है। यह आंतों को स्‍वस्‍थ बनाने के साथ पेअ के अल्‍सर और कोलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है। इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और अल्‍सर, डायरिया और अपच की समस्‍या नहीं होती है।

6. दर्द कम करें
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हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया का निदान होता हैं। साथ ही इसका रियूमेटॉइड गठिया के कारण होने वाली सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और मांसपेशियों को लचीला बनाता हकै जिससे दर्द कम हो जाता है

7. गहरी नींद में सहायक
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हल्‍दी शरीर में ट्रीप्टोफन नामक अमीनो अम्ल को बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है। इसलिए अगर आप रात में ठीक से सो नहीं पा रहें है या आपको बैचेनी हो रही है तो सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध पीएं। इससे आपको गहरी नींद आएगी और नींद ना आने की समस्या दूर हो जाएगी।

डर हमारे विचारों को कुंद कर देता है

बात उन दिनों की है जब मेरे पतिदेव का ट्रांसफर चंडीगढ हो गया था और मैं पहली बार घर से बाहर अपने लोगों से दूर आई थी | मेरा बेटा सिर्फ 6 महीने का ही था, जलवायु परिवर्तन की वजह से बेटा काफी बीमार हो गया | पडौसी से डॉ. की जानकारी लेकर हम डॉ. के यहाँ चले गये..चेक-अप व दवा लेने के बाद क्योंकि इन्हें वहाँ से सीधे ऑफिस जाना था अतः इन्होनें मुझे एक रिकशे में बिठा दिया और ये अपने ऑफिस चले गये; चुंकि मैं पहली बार घर से बाहर निकली थी उपर से अंजाना शहर,,, मैं मन ही मन बहूत डरी हुई थी |

अभी हम थोडा ही दूर पहुंचे थे कि लगा कोई पीछा कर रहा है और कुछ बोल भी रहा है | एक तो पहले ही डर लग रहा था, अब तो मैं ओर ज्यादा डर गई और रिक्शे वाले से कहा कि भैया थोडा तेज़ चलाओ’ पर ये क्या ? रिक्शा जितना तेज होता,,, पीछे आने वाला उतनी ही तेजी से आ रहा था,, मैं इतना डरी हुई थी की पीछे मुड कर भी नही देखा कि कौन है और वो क्या कहना चाह रहा है ? उस ठंड के मौसम में भी मैं पूरी तरह से पसीने से भीग गई थी |

तभी एकदम से एक साईकिल सवार रिक्शे के बगल में आ गया, अब तो मेरे होश-फाख्ता हो गये |

तभी वो जोर से चिल्ला कर बोला कि मैडम, अपनी साडी का पल्लु सम्भालिये, वो रिक्शे के पहिये में आ जायेगा”, ये बोलता हुआ वो आगे निकल गया | मेरी आँखे भीग गई ये सब सुनकर | कुछ पल तो मैं हैरान सा उसे जाते हुए देखती व सोचती ही रह गई कि “अरे, ये तो कोई भला-मानुष था और मैं सोच रही थी कि ‘वो मेरा पीछा कर रहा है, जरुर छीना-झपटी का इरादा है उसका’ ?”  मन ही मन उस से और प्रभु से माफी मांगी और ईश्वर का शुकिया अदा किया |

कभी-कभी हमारा भय ही हमें इतना डरा देता है कि हम कुछ भी अनुमान लगा लेते है | जबकि हमें पहले स्थिति का जायजा लेना चाहिये उसका सामना करना चाहिये | डरना तो बिल्कुल भी नही चाहिये, डर हमारे विचारों को कुंद कर देता है, दिमाग को बंद कर देता है | सारी स्थिति को समझ कर जब हम कुछ भी करेंगे तो वो कभी भी गलत नही होगा | खैर जीवन में आने वाली कई परिस्थितियों नें ही आज मुझे अंदर से मजबूत बना दिया है | शायद तभी कहा गया है कि जीवन सबसे बडा गुरू है और जीवन में घटित होने वाली घटनायें हमारे अहम सबक !!!

~ज़िन्दगी~

जिंदगी अपने नए-नए रूपों में हमसे मिलती हैं और उसका हर रूप अपने आप में अनूठा होता है ! जिंदगी चाहे हमें जिस भी रूप में मिले हमें उसके हर रूप का मुस्कुरा कर स्वागत करना चाहिए  !
 सबसे पहले ज़िन्दगी जब मुझे अपने परिवर्तित रूप में मिली थी तो मैं बेहद परेशां हो गयी थी, पर हर थोड़े समय के बाद वो अपने बदले हुए रूप में मेरे सामने आई ,तब मैंने सोचा और महसूस किया कि ये तो ज़िन्दगी का अपना एक ढंग है , वो हर बार अपना रूप बदलती रहती है !
 कोई भी रूप सदैव नहीं रहने वाला , चाहे वो संकट के रूप में मिले या खुशनुमा रूप में , हर रूप थोड़े दिन में  किसी और रूप में बदल जाता है, वो नित्य परिवर्तित है, ये उसकी नियति है ! 
अब सोचने वाली बात ये है कि जब उसके रूप नित्य बदलने ही हैं तो फिर हम परेशां क्यों हों ? हमें भी उसके हर परिवर्तित रूप को सहज स्वीकार करते हुए उसका स्वागत करना चाहिए ! जब हम उसे सहज स्वीकार करेंगे तो वो हमारे लिए केवल दुखद या केवल सुखद परिस्तिथि नहीं रहेगी बल्कि पूर्णतः शांतिमय पल का आभास कराएगी !
अब ये तो हम पर है की हम ज़िन्दगी को कैसे जीना चाहते हैं ? हंसकर, रोकर, गुनगुनाकर या उसके हर बदलते हुए रूप का आनंन्द लेते हुए शांत रहकर !
मेरे विचार से तो हमें ज़िन्दगी के हर रूप को सहज स्वीकार करते हुए उसका स्वागत करना चाहिए ! यूँ भी गर गहराई से देखेंगे तो पाएंगे की किसी भी परिस्तिथि  को हम बदल तो सकते नहीं, वो तो ज्यों की त्यों ही रहेगी, फिर रोनेधोने से क्या बदलने वाला है ! पर हाँ हमारी सोच बदलने से हम उसे सहज स्वीकार करेंगे तो शांत जरुर रह सकेंगे, तो फिर उसे सहज स्वीकार करना ही बेहतर है न, ताकि हम जीवन को बेहतर जी पाएं !!
ये तो ज़िन्दगी के प्रति मेरे विचार हैं , आपको क्या लगता है ये आप बताईये ?