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नेता जी का रहस्य

नेताजी की जिंदगी का रहस्य जितना बडा है उस से ज्यादा बडी है इस से जुडी राजनीति | भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित व अनसुलझे जिस राज से आज तलक भी पर्दा नही उठ पाया था, उस से अब बहुत कुछ बाहर आने की उम्मीद है | पिछले 70 सालों में नेताजी को लेकर कई तरह की अफवाहें उठती रही, लेकिन कोई भी सरकार उनसे जुडी गोपनीय फाईलों को सार्वजनिक करने का फैंसला तक नही कर सकी | इसे लेकर केंद्र में सबसे लम्बे समय तक सरकार में रही कांग्रेस पर सवाल उठते रहे हैं, पर अब ममता सरकार ने जब बोस से जुडी फाईलों को सार्वजनिक कर दिया है तो कांग्रेस के लिये नई मुसीबत खडी हो गई है |

 इन फाईलों में कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं जिससे नेताजी और उनके परिवार की जासूसी करवाने के आरोपों को बल मिल रहा है | नेताजी के परिजनों ने यह कहकर एक बार फिर से सवाल खडा कर दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधानचंद्र रॉय और सिद्धार्थ शंकर रॉय के माध्यम से कई अहम फाइलों  को नष्ट करवा दिया | कुछ फाइलों में साफ स्पष्ट हो रहा है कि नेताजी के परिजनों की उनकी मौत के बाद भी जासूसी कराई जा रही थी |

एक फाइल में तत्कालीन हावडा सी.आई.डी. द्वारा दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी और ब्रिटिश गुप्तचर विभाग से एसे तथ्य मिले हैं जिस से पता चला है कि उस दिन हादसे में नेताजी की मौत नही हुई थी बल्कि वे सोवियत संघ या चीन चले गये थे | नेताजी से जुडी फाइलों के बारे में कोलकाता पुलिस के अलावा कलकत्ता विश्वविधालय के तीन प्रोफेसर भी जानते थे | कोलकाता पुलिस ने इन तीनों प्रोफेसरों से नेताजी से जुडी फाइलों को एक जगह जमा करने का अनुरोध किया था | इन्हीं फाइलों को शुक्रवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक किया है | अब केंद्र सरकार पर इसका दबाव बढेगा कि वह भी अपने पास मौजुद नेताजी से जुडे दस्तावेज सार्वजनिक करे | 

नेताजी से जुडे कई अनुत्तरित सवाल :

नेताजी के लापता होने को लेकर वैसे तो कई खबरें आई पर कई अनुत्तरित सवालों का जवाब अब तक नही मिल पाया | बंगाल सरकार ने भले ही बोस से जुडी फाइलें सार्वजनिक कर दी हों पर नेता जी को लेकर शोध करने वाले शोधार्थियों का मानना है कि इस से कोई खास जानकारी नही मिलने वाली | खुद नेताजी रिसर्च ब्युरो की अध्यक्ष कृष्णा बोस का भी ऐसा ही सोचना है | उनका मानना है कि जब तक केंद्र सरकार के पास मौजुद सौ से अधिक फाइलें सार्वजनिक नही की जायेंगी तब तक पूरे रहस्य से पर्दा नही उठाया जा सकता | हालांकि कई जानकारों का कहना है कि रहस्य से पर्दा उठाने में ये 64 फाइलें काफी मददगार साबित हो सकती हैं |

अब तक देशवासी नही जान सके हैं कि :

नेताजी की मौत कब हुई और कैसे हुई ?

क्या नेताजी वर्ष 1964 में भी जीवित थे ?

क्या नेता जी ही फैजाबाद के गुमनामी बाबा थे ?

क्या नेताजी पर रूस व जवाहर लाल नेहरू के बीच कोई पत्राचार हुआ था ?

क्या उनकी मौत विमान दुर्घटना में हुई थी ?

क्या वे किसी राजनीति या कूटनीति षडयंत्र का शिकार हुए थे ?

क्या वे अपने किसी समकालीन कद्दावर नेता की उपेक्षा के शिकार थे ?

नेताजी ने देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिये किस तरह की सामरिक व कूटनीतिक रणनीति तैयार की थी इत्यादि कई तरह के प्रश्न हैं जो सभी देशवासियों के दिल में उठते हैं व जवाब ना मिल पाने की वजह से अनुत्तरित रह जाते हैं | पर अब ममता जी की ये अद्भुत पहल शायद कोई नया मोड ले और सभी देशवासी इन अनुत्तरित रह जाने वाले सवालों के जवाब पा सकें |

अहम बात : दैनिक जागरण अखबार में छपने वाले समाचारों को आधार मानकर लिखा गया है ये लेख,,, जो सभी भारतवासियों के अंतर्मन में उठने वाले अंतर्द्वंदो को भी प्रकट करता चलता है |

फिलहाल तो हम सभी देशवासी ममता जी का तहे-दिल से आभार प्रकट करते हैं कि चौसठ फाइलों को सार्वजनिक कर उन्होनें जो साहस का काम किया है, यह देश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला कार्य है | अपने नायक के साथ हुए अन्याय और गुमनामी में मरने के लिए मजबूर करने वाले लोगों और परिस्थितियों को जानना इस देश के हर नागरिक का हक है |  केंद्र सरकार के लिये अब परीक्षा की घड़ी है कि वो बाकी की फाइलों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करे | अब देश कोई जुमला नहीं सुनना चाहता, अपने नेता के बारे में जानना चाहता है | अगर वाकई लोकतंत्र है और जनता की जरा सी भी क़द्र है, तो यह काम जल्द से जल्द होना चाहिए |  अब हर देशवासी को  इंतजार है नेताजी के हर रहस्य पर से पर्दा उठने का |

जय हिंद |

कौन हूँ मैं ???

कौन हूँ मैं…………?

मैं को जानने की खोज जब शुरू हो जाती

अनुत्तरित प्रश्नो की झडी तब लग जाती

ज्यों-ज्यों यात्रा सतत आगे बढती जाती

 

शब्दों की वाणी मौन होती जाती

शब्दों की यात्रा गौण होती जाती

शून्य में है सारी भाषा खो जाती

 

तर्क-वितर्क इक किनारे जा लगते

बुद्धि भी निष्क्रिय-निष्प्राण हो जाती

आंतरिक मेधा-शक्ति जागृत हो जाती

 

यात्रा यूँ ही अनवरत चलती जाती

इक दिन जरूर होगी ये तलाश पूरी

विश्वास की लौ निरंतर जगमगाती

तुलसी से उपचार

भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।

 

तुलसी से उपचार ———

 

* लिवर (यकृत) संबंधी समस्या: तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।

 

* पेटदर्द होना: एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है। तुलसी रस और अदरक का रस समान मात्रा में लेने से दर्द में राहत मिलती है। इसके उपयोग से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है।

* तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर में ताकत और स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है।

 * फोड़े फुंसी आदि पर तुलसी के पत्तो का लेप लाभदायक होता है।

* तुलसी की मंजरी और अजवायन देने से चेचक का प्रभाव कम होता है।

* कान के साधारण दर्द में तुलसी की पत्तियों का रस गुनगुना करके डाले।

* जहरीले कीड़े या सांप के काटने पर तुलसी की जड़ पीसकर काटे गए स्थान पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है।

* चर्म रोग होने पर तुलसी के पत्तों के रस के नींबू के रस में मिलाकर लगाने से फायदा होता है।

* प्रसव के समय स्त्रियों को तुलसी के पत्तों का रस देन से प्रसव पीड़ा कम होती है।

* तुलसी की जड़ का चूर्ण पान में रखकर खिलाने से स्त्रियों का अनावश्यक रक्तस्राव बंद होता है।

* सफेद दाग, झाईयां, कील, मुंहासे आदि हो जाने पर तुलसी के रस में समान भाग नींबू का रस मिलाकर 24 घंट तक धूप में रखे। थोड़ा गाढ़ा होने पर चेहरे पर लगाएं। इसके नियमित प्रयोग से झाईयां, काले दाग, कीले आदि नष्ट होकर चेहरा बेदाग हो जाता है।

* आलस्य निराशा, कफ, सिरदर्द, जुकाम, खांसी, शरीर की ऐठन, अकड़न इत्यादि बीमारियों को दूर करने के लिए तुलसी की चाय का सेवन करें।

* पाचन संबंधी समस्या : पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।

 

* बुखार आने पर : दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।

 

* खांसी-जुकाम : करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। तुलसी की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है। इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। कफ निवारणार्थ तुलसी को काली मिर्च पाउडर के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।

 

* सर्दी से बचाव : बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग 10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।

 

* श्वास की समस्या : श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है। 

* कफ निवारणार्थ तुलसी को काली मिर्च पाउडर के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।

* रोज सुबह तुलसी की पत्तियों के रस को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। 

तुलसी की केवल पत्तियां ही लाभकारी नहीं होती। तुलसी के पौधे पर लगने वाले फल जिन्हें आमतौर पर मंजरी  कहते हैं, पत्तियों की तुलना में कहीं अधिक फायदेमंद होता है। विभिन्न रोगों में दवा और काढे के रूप में तुलसी की पत्तियों की जगह मंजरी  का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया है। किंतु जब भी तुलसी के पत्ते मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लें। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि तुलसी के पत्तों में पारा धातु के अंश होते हैं। जो चबाने पर बाहर निकलकर दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

तुलसी का पौधा मलेरिया के कीटाणु नष्ट करता है। नई खोज से पता चला है इसमें कीनोल, एस्कार्बिक एसिड, केरोटिन और एल्केलाइड होते हैं। तुलसी पत्र मिला हुआ पानी पीने से कई रोग दूर हो जाते हैं। इसीलिए चरणामृत में तुलसी का पत्ता डाला जाता है। तुलसी के स्पर्श से भी रोग दूर होते हैं। तुलसी पर किए गए प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में यह लाभकारी है। इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है।

अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो ???

एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी, ऐ लड़के, इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में ? लड़के ने कहा, पच्चीस पैसे। सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में
देगा क्या ? यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। 

उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराया पर मौन रहा, जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा। महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे- पीछे गए। बोले : ऐ लड़के, ठहर जरा; यह तो बता तू हंसा क्यों ? वह लड़का बोला, महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास
तो लगी ही नहीं थी। वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे। महात्मा ने पूछा, लड़के ! तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया, महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता। वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है। फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं? पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना होती है, वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते। पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते |
अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर खुदा हे तो फिर फिक्र क्यों ??

 

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर विशेष

|| ओम गणपतये नमः ||

वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभः |

निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्व कार्येशु सर्वदा ||

भारतीय संस्कृति आध्यात्मवादी है, तभी तो उसका स्त्रोत कभी सूख नही पाता है | वह निरंतर अलख जगाकर विपरीत परिस्थितियों को भी आनंद और उल्लास से जोडकर  मानव जीवन में नवचेतना का संचार करती रहती है | त्यौहार, पर्व व उल्लास हमारी भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है, जिसमें जनमानस घोर विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन यापन करते हुये पर्वों के उल्लास, उमंग मे रमकर खुशी का मार्ग तलाश ही लेते हैं | मंगलकर्ता, विघ्नविनाशक गणेश जी के जन्मोत्सव की धूम चारों ओर मची है | मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन गणेश जी का आविर्भाव हुआ था, इसिलिये इस तिथि को गणेश चतुर्थी कहा जाता है | इस दिन गणेश जी की पुजा करते हैं व उत्सव मनातेहैं | कभी महाराष्ट्र में सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट और पेशवा आदि राजाओं द्वारा चलाई गई गणेशोत्सव की प्रथा आज महाराष्ट्र तक ही सीमित न होकर देश के कोने कोने में ही नही अपितु कई दुसरे राष्ट्रों में भी मनाया जाने वाला पर्व बन बैठा है

गणेशोत्सव की धूम सावर्जनिक स्थलों में विधुत साज-सज्जा के साथ सजाई गई गणेश जी की प्रतिमाओं के विराजमान होने से तो है ही साथ ही साथ घर-घर में विभिन्न सुंदर आकार-प्रकार की प्रतिमाओं के विराजने से और भी बढ जाती है |

बुद्धि के देवता प्रथम पुज्य गणेश जी :

प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारे |

तिनके पूरन कारज सारे ||

अर्थात जो व्यक्ति बुद्धि के देवता श्री गणेश जी का सर्वप्रथम ध्यान करता है, उसके सभी कार्य पूर्ण होते हैं | गणेश जी को प्रथम पुज्य देव कहा गया है इसका भावार्थ सीधा सा यह है कि जो व्यक्ति अपने कार्य को पूर्ण करना चाहता है उसे सर्वप्रथम अपनी बुद्धि को परखना होगा उस पर विश्वाश करना होगा और उसके प्रयोग मे सफलता हासिल करनी होगी | गणेश जी को मंगलकर्ता और विघ्नविनाशक भी कहा जाता है | यह भी इस बात की और संकेत करता है कि बुद्धि के सद्प्रयोग से ही सारी बाधाएं दूर हो जातीहैं और अच्छे दिनों की शुरूआत हो जाती है | यह तो हम जानते ही हैं कि मनुष्य के लिये बुद्धि कितनी आवश्यक है | लेकिन बुद्धि का उपयोग किस तरह से किया जाये ये अत्यंत ही महत्वपूर्ण है | जहाँ सद्धबुद्धि हमें नेक कार्यों की ओर प्रेरित करती है वहीं दुर्बुद्धि हमें गलत कामों की ओर प्रवृत करती है | गलत काम चाहे कितनी भी होशियारी से किये गये हों, लेकिन इनका परिणाम सदैव कष्टकारी ही होता है | गणेश पूजा का निहितार्थ यही है कि हम बुद्धि को तो सर्वोपरि मानें, लेकिन हमारे कार्यों और व्यवहार में सद्बुद्धि की छाप हो |

गणपति का प्रेरक स्वरूप :

बुद्धि के देवता श्री गणेश जी का स्वरूप हमारी प्रेरणा का स्त्रोत भी हैं | उनका बडा मस्तिष्क विशाल बुद्धि का परिचायक है जो बडी और उपयोगी बातें सोचने को प्रेरित करता है | उनकी छोटी-छोटी आंखें  हमें अपने कार्यों को सुक्ष्म और ध्यानपूर्वक करने की प्रेरणा देते हैं | उनके कान और नाक (सूंड) विशाल है जबकि मुंह उसकी तुलना में बहुत छोटा है जो ये दर्शाता है कि व्यक्ति को सभी की बातें सुननी चाहिये लेकिन वाणी का प्रयोग कम से कम करना चाहिये एवम संकट को दूर से ही सूंघ लेना चाहिये | उन्होने मस्तक पर चंद्रमा धारण किया हुआ है और चंद्र को शीतल माना गया है | जो इस बात के लिये प्रेरित करता है कि बुद्धि तभी सही ढंग से कार्य करती है जब उसके पास शीतलता होगी | जो कार्य ठंडे दिमाग से किये जाते हैं उनकी गुणवत्ता अधिक होती है | साथ ही जब भी जीवन में संकट के क्षण आयें तब यदि हम ठंडे दिमाग से हल निकालें तो कठिनाइयों से पार पा सकने योग्य मार्ग निकाल सकते हैं | गणेश जी के मुख पर ना तो हर्ष का अतिरेक है, न ही दुख की छाया | यह इस बात का संकेत है कि बुद्धिमान व्यक्ति सुख में न तो अधिक हर्षित होता है और न ही दुख में अधिक दुखी |

आइये, आज गणपति जी के जन्मदिवस पर उनको नमन करें और खुद से वादा करें कि जब भी कोई संकट आयेगा तो ठंडे दिमाग से उसका हल खोजेंगे | ज्यादा से ज्यादा व ध्यानपूर्वक ही सुनेंगे | कम से कम, मधुर एवम सारगर्भित ही बोलेंगे | सुख में अत्याधिक हर्षित नही होंगे और न ही दुख में अत्याधिक दुखी | सदैव अपनी बुद्धि को सकारात्मक कार्यों में ही लगायेंगे | यही होगा सही मायने में सार्थक पर्व | जिससे जनमानस में सुख व शांति का आविर्भाव होगा | तभी सार्थक होगा गणपति जी का जन्मोत्सव | तभी सही मायने में आज के पर्व का प्रयोजन सिद्ध हो सकेगा | 

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें |

श्री गजानंद जी महाराज आपके घर संसार व जीवन में सदैव आनंद मंगल एवम रिद्धि सिद्धि बनाये रखे |

‘ हँसता चेहरा ‘

गुमसुम, गुपचुप
तन्हा सी……
कौन है ये ?
मैं तो नही ?

फिर……..
सब इसे मेरे नाम से,
क्यों पुकार रहे !

मैंने तो अपने चेहरे को
सदा मुस्कान से था ढका हुआ
फिर आज ये कैसे हुआ ?
कि, असली चेहरा सबको दिखा

शायद ………..
अंतर्वेदना इतनी बढी कि
वो, मुस्कान भी उसे छुपा ना सकी
जिससे चेहरे की उदासी थी ढकी

हर चेहरा जो हँसता है
जरूरी नही, कि वो प्रसन्न ही हो

—***—

 @ शशि शर्मा ‘खुशी’

‘सावन की बरसात’

अबके बरस यूँ बरसा सावन

ज्यूँ खारे- खारे मोती

इन मोती के सहारे मैं

अपने आंसूँ धोती

बैरन हो गई नींद भी मानों

मैं, सारी रैन ना सोती

बरस-बरस कर अखियाँ मेरी

तकिये को भिगोती

रात-रात भर जाग कर

हृदयकाश की छाँव तले

मधुर पलों की प्यार भरी

यादों के मोती पिरोती

कभी तो मिलोगे साजन मेरे

उम्मीद दिल में संजोती

दिन बीते या बीते बरस

आस कभी ना खोती

अबके बरस यूँ बरसा पानी

ज्यूँ खारे- खारे मोती

इन मोती के सहारे

मैं अपने आंसूँ धोती

@ शशि शर्मा  ‘खुशी’