खुशियाँ और दुख

मेरी खुशियाँ सिर्फ मेरी नहीं होती,

बिखरा देती हूँ उन्हें अपने इर्द गिर्द।

फिर जो भी आता मेरे दायरे में,,,

ये उसकी भी खुशियाँ हो जाती हैं |

भीग जाता,,, हो जाता सराबोर वो भी,

उस खुशी की महक से ।

वो भीनी भीनी खुश्बू खुशी की,

कर देती मजबूर उसे भी खुश हो जाने को।

खुश हो कर खुशियाँ लुटाने को 😊

12974297_1719310288290026_2876178142872984415_n

मेरे दुख सिर्फ मेरे अपने होते हैं

समेट लेती हूँ उन्हें अपने आँचल में।

छुपा लेती हूँ उन्हें पलकों के साये में

जो नमीं बन समाए रहते हैं पलकों तले

नहीं पड़ने देती किसी पर भी साया उन दुखों का,

कर देती हूँ दफन उन्हें दिल की गहराईयों में

ताकि न देख पाए कोई भी…

न जान जाए कोई उनकी हकीकत।

नहीं चाहती मैं,,,

कि कोई भी उदास हो

जो भी मेरे आसपास हो।

रहे सदा वो खुशहाली के साये में,

खुशियाँ पाए खुशियाँ लुटाए।

इस फूल की मानिंद,
उडा देती हूँ खुशी की महक चहूँओर |

सहेज लेती हूँ दुख रूपी काँटो को
अपने तन मन के इर्द-गिर्द |

इसी में मेरे नाम की सार्थकता है
इसी से मेरा संसार चहकता है ||

 

@ खुशी

Sponsored Post Learn from the experts: Create a successful blog with our brand new courseThe WordPress.com Blog

WordPress.com is excited to announce our newest offering: a course just for beginning bloggers where you’ll learn everything you need to know about blogging from the most trusted experts in the industry. We have helped millions of blogs get up and running, we know what works, and we want you to to know everything we know. This course provides all the fundamental skills and inspiration you need to get your blog started, an interactive community forum, and content updated annually.

~~ बेटी की विदाई ~~

marriage3

चित्र गूगल से साभार

वो दिन जीवन में लाया खुशियाँ अनंत,
जब नन्ही सी बिटिया गोद में आई थी।

जन्नत मिल गई थी मानों मुझको जब,

अखियाँ मीचें इक कली मुस्काई थी।

हुई थोडी बडी तो घर भर दिया किलकारी से,
अपनी तुतलाती मीठी बोली से ढ़ेरों बातें बनाई थी।

परियों जैसी फ्रॅाक पहन वो कितनी इठलाई थी, 

खिलखिलाहट से फिर, घर-आँगन महकाई थी।

बीता बचपन नन्ही परी पर जवानी छाई थी,
हु बु हु दिखती वो मेरी ही तो परछाईं थी।

अब कठिन लम्हे आए जब करनी उसे पराई थी,
पत्थर दिल रहा होगा जिसने ये रीत बनाई थी।

थी जो माँ-बाप के कलेजे का टुकड़ा,
आज उसी की विदाई घड़ी आई थी।

धूमधाम से कर पाणिग्रहण संस्कार,
नम आँखों से देनी पड़ी विदाई थी।

बचपन से इस आँगन सींचा जिस पौध को,
आज फूल बन वो दूजे आँगन को महकाएगी।

दे ढ़ेरों दुआएँ शुभाशीष माँ-बाप ने उसे विदा किया,
इस घर-आँगन में अब उसकी यादें ही मुस्काई थी।

@ शशि शर्मा”खुशी”

 

–मन बंजारे–

चलता चल तु मन बंजारे,

बडी दूर है तेरी ठौर,

लम्बी डगर दूर का सफर,

छूट जाये ना जीवन-डोर,

है तु ऐसी राह का मुसाफिर

दिखे कहीं ना जिसका छोर

चलते जाने में जो सुख है

मिलेगा ना वो कहीं ओर

मिलेंगे राह में नये संगी

करेंगे तुझसे वो नित होड

कुछ दूर तो तेरे संग चलेंगे

बीच राह में फिर देंगे छोड

तु बस अनवरत चलते जाना

ले अपने अनुभवों का निचोड

मिल जायेगी मंजिल इक दिन

थम जायेगी सब भागम-दौड

खत्म होगा सफर जिस क्षण

होगी परम शांति चहूँ ओर

चलता चल तु मन बंजारे,

बडी दूर है तेरी ठौर

@ शशि शर्मा ‘खुशी’

-मैं पल दो पल का शायर हूँ की धुन पर गीत–

गीत लिखने का प्रथम प्रयास 😊
बताइएगा अवश्य कैसा लगा? कमियों का स्वागत है।
–मैं पल दो पल का शायर हूँ की धुन पर गीत–
___________________

मैं कलकल बहती सरिता हूँ
हरपल बहना मेरी रवानी है
सदियों से बहती ही जाती हूँ
युगों युगों में मेरी कहानी है

तुमसे पहले कितनी पीढ़ी
आई और आकर चली गई
कुछ पाप बहाकर चली गई
कुछ शीश नवांकर चली गई
वो भी एक पल का किस्सा थे
तुम भी एक पल का किस्सा हो
कल मुझसे जुदा हो जाओगे
जो आज इस पल का हिस्सा हो
मैं कलकल बहती सरिता हूँ
……… ….

मैं स्वर्ग से धरा पे आई थी
और शिव की जटा में समाई थी
धरती ने मुझको थाम लिया
तुम मनु ने माँ सा मान दिया
भागीरथ ने इतिहास रचा
तप के बल से वरदान लिया
तारा जब उसके कुल को
तो माँ गंगा मुझको नाम दिया
मैं कलकल बहती सरिता हूँ
……….. ….

कल और आएंगे वसुधा की
नई इबारत लिखने वाले
कुछ अपनी धुन में चलने वाले
कुछ होंगे बस सुनने वाले
कल कोई मुझको प्यार करे
या मेरे लिए तकरार करे
मुझको तो बहते जाना है
शीतलता मेरी उद्धार करे
मैं कलकल बहती सरिता हूँ

मैं कलकल बहती सरिता हूँ
हरपल बहना मेरी रवानी है
सदियों से बहती ही जाती हूँ
युगों युगों में मेरी कहानी है

@ शशि शर्मा”खुशी”
25/1/16

स्वाभिमान

किसी गाँव में रहने वाला एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ
गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस लौटते समय जब
सभी दोस्त नदी किनारे पहुंचे तो लड़के ने नाव के किराये के लिए
जेब में हाथ डाला। जेब में एक पाई भी नहीं थी। लड़का वहीं ठहर
गया। उसने अपने दोस्तों से कहा कि वह और थोड़ी देर
मेला देखेगा। वह नहीं चाहता था किउसे अपने दोस्तों से नाव
का किराया लेना पड़े।

उसका स्वाभिमान उसे
इसकी अनुमति नहीं दे रहा था।

उसके दोस्त नाव में बैठकर नदी पार चले गए। जब उनकी नाव
आँखों से ओझल हो गई तब लड़के ने अपने कपड़े उतारकर उन्हें सर
पर लपेट लिया और नदी में उतर गया। उस समय नदी उफान पर
थी। बड़े-से-बड़ा तैराक भी आधे मील चौड़े पाट को पार करने
की हिम्मत नहीं कर सकता था। पास खड़े मल्लाहों ने भी लड़के
को रोकने की कोशिश की।

उस लड़के ने किसी की न सुनी और किसी भी खतरे की परवाह न
करते हुए वह नदी में तैरने लगा। पानी का बहाव तेज़ था और
नदी भी काफी गहरी थी।

रास्ते में एक नाव वाले ने उसे
अपनी नाव में सवार होने के लिए कहा लेकिन वह लड़का रुका नहीं,

तैरता गया। कुछ देर बाद वह सकुशल दूसरी ओर पहुँच गया।

उस लड़के का नाम था ‘लालबहादुर शास्त्री’. !!

जीवन इक रंग-मंच

जीवन इक रंग-मंच है
जिसके हर परिप्रेक्ष्य में
हम नित्य नाटक रचते हैं
हमारा हर कार्य,भाव-भंगिमा
उसी नाटक का एक हिस्सा है
हम सभी अपने-अपने रोल
बखुबी अदा करते जाते हैं

सभी अपनी-अपनी जगह पर
मंजे हुए कलाकार हैं, और
अपनी कला का बखुबी प्रदर्शन
करते जाने का प्रयत्न करते हैं
फिर भी सभी अपने ही अंतर्मन
में एकदम खोखले और खाली-खाली हैं

बाहर चाहे कितने भी खुश
नजर क्यों ना आते हों
भीतर से सभी दुःखी
तन्हा-तन्हा और अकेले हैं
क्योंकि वे खुद को नही पहचानते
जो रोल वो इस संसार में निभा रहे हैं
उसी को स्वयम का स्वरूप समझ लेते हैं
स्वयं में व किरदार के भेद को
वो समझना ही नही चाहते
जिस दिन इस अंतर को
उन्होनें जान लिया समझो
स्वयम को पा गये,
अपनी पहचान पा गये

उसी दिन से वो ना केवल
अपने किरदार को बखुबी निभायेंगे
बल्कि अंतर्मन से भी खुश रहेंगे
पूर्ण होंगे, फिर कभी खुद को तन्हा

ना पायेंगे
यही जीवन है दोस्तो
यही है जीवन का सच
जिसने इसे जान लिया
उसने सब सुख पा लिया
जो नही जान पाया वो
सदैव तन्हा,उदास व दुखी रहा

@ शशि शर्मा “खुशी”

माँ की ममता

माँ की ममता का अदभुत उदाहरण जो आपकी आँखें नम कर देगा ।
“बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि पता नहीं क्यों मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया.”
कुछ समय पहले जापान में आये सुनामी के दौरान एक दिल को छू लेने वाली घटना हुई…
भूकंप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए घर की जांच कर रहा था. बारीक दरारों में से महिला का मृत शरीर दिखा, लेकिन वो एक अजीब अवस्था में था. महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी. ठीक वैसे ही जैसे मंदिर में लोग भगवान के सामने नमन करते है. उसके दोनों हाथ किसी चीज़ को पकडे हुए थे और भूकंप से उस महिला की पीठ और सर को काफी क्षति पहुंची थी.
काफी मेहनत के बाद दल के सदस्य ने बारीक दरारों में कुछ जगह बनाकर अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. बचाव दल को उम्मीद थी कि शायद महिला जिंदा हो, लेकिन महिला का शरीर ठंडा हो चूका था और बचाव दल समझ गया की महिला मर चुकी है.
बचाव दल उस घर को छोड़ दूसरे मकानों की ओर चल पड़ा. बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि, ‘पता नहीं क्यूँ मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया.’
उसके बाद बचाव दल एक बार फिर उस महिला के घर की तरफ पहुंचा. दल प्रमुख ने मलबे को सावधानी से हटा कर बारीक दरारों में से अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. महिला के शरीर के नीचे की जगह को हाथों से टटोलने लगा. तभी उनके मुंह से निकला, ‘बच्चा… यहाँ एक बच्चा है.’ 
अब पूरा दल काम में जुट गया. सावधानी से मलबा हटाया जाने लगा. तब उन्हें महिला के मृत शरीर के नीचे एक टोकरी में रेशमी कम्बल में लिपटा हुआ 3 माह का एक बच्चा मिला. दल को समझ में आ चुका था कि महिला ने अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने जीवन का त्याग किया है. 
भूकंप के दौरान जब घर गिरने वाला था तब उस महिला ने अपने शरीर से सुरक्षा देकर अपने बच्चे की रक्षा की थी. डॉक्टर भी जल्द ही वहां आ पहुंचे. दल ने जब बच्चे को उठाया तब बच्चा बेहोश था.
बचाव दल ने बच्चे का कम्बल हटाया तब उन्हें वहां एक मोबाइल मिला, जिसके स्क्रीन पर सन्देश लिखा था, ‘मेरे बच्चे अगर तुम बच गए तो बस इतना याद रखना कि तुम्हारी माँ तुमसे बहुत प्यार करती थी.’ 
मोबाइल बचाव दल में एक हाथ से दूसरे हाथ जाने लगा, सभी ने वो सन्देश पढ़ा, सबकी आँखें नम हो गयी…

ये सिर्फ एक माँ ही कर सकती है | अपने बच्चे को बचाने की खातिर अपने जीवन का बलिदान | इसिलिये ही तो माँ को धरती का भगवान माना गया है |
अगर इस कहानी ने आपके दिल को भी छुआ हो तो इसे दूसरों के साथ भी बांटें। 

विषय : गौ माता

images (1)
गौ माता है पर उपकारी
कृष्ण को ये बेहद प्यारी
प्रभु का वरदान ये भारी
संतों ने भी आरती उतारी
दुग्ध, गौमुत्र हो या गोबर
सब हैं एक से एक बढकर
अमृत समान हैं चीजें सारी
गोबर खाद से खिलती क्यारी
खाती है बस घास चारा
देती पर दुध ढेर सारा
बछडा इसका बेहद प्यारा
उसके हिस्से का दूध भी वारा
अपने लिये कुछ न चाहती
हम पे अपना सर्वस्व लुटाती
निस्वार्थ भाव से देती जाती
फिर भी क्यों ये मारी जाती
रे! मनु, स्वार्थ को दे त्याग
अपने कर्त्तव्य से मत भाग
माँ सम सब तुझ पे लुटाती
फर्ज निभा तू बेटे की भाँति
गौ माता के दूध का कर्ज
उसे उतारना अब तेरा फर्ज
न देना कभी कोई दुख दर्द
दूर करना उसके हर मर्ज
ना खींची जाये कभी खाल
ना होने देना हाल बेहाल
दूध देना बंद हो तब भी
रखना तुम माँ का ख्याल
गोपाष्टमी को हम करते पूजा
माँ का हमारी ये रूप है दूजा
जिसने तुझ पे है जिंदगी वारी
न फिरे गलियों में वो मारी मारी
@ शशि शर्मा “खुशी”
19/01/16

 

पैसा

indian-rupee_1428583957
इंसान ही इक ऐसा इकलौता जीव,
जो धरा पर रहने के दाम चुकाता है |
धरती माँ तो सब मुफ्त में लुटाती,
वो फिर उसकी कीमत है लगाता |
लगा कीमत खुद को विद्वान बताता,
कीमत अदा करने को पैसे कमाता |
पैसों से जमीन जायदाद जुटाता,
खाने पहनने को सामान ले आता |
फिर इक दिन इसी पैसे की खातिर,
भाई ही भाई का दुश्मन बन जाता |
पैसा इंसान जरुरत के लिये बनाता,
वही इक दिन उस पर हावी हो जाता |
जो इक दिन सेवक था इंसान का,
वही इक दिन मालिक बन जाता |
पैसा इक दिन है सर चढकर बोलता,
हर रिश्ता तब इंसां पैसे से तौलता |
कुछ तो सोचो और बुद्धि लगाओ,
पैसे के ना तुम गुलाम बन जाओ |
जरुरत जितना तुम पैसा कमाओ,
इसके पीछे न स्वास्थ्य व रिश्ते गंवाओ |
@ शशि शर्मा “खुशी”
13/01/16

–आप वही दे सकते हैं जो आपके पास है–

एक बार एक व्यक्ति ने एक नया मकान खरीदा..
उसमे फलों का बगीचा भी था..
मगर पडौस के मकान पुराने थे..और उनमे कई लोग रहते थे.
कुछ दिन बाद उसने देखा कि पडौस के मकान से किसी ने बाल्टी भर कूडा उसके घर दरवाजे पर डाल दिया है..
शाम को उस व्यक्ति ने एक बाल्टी ली उसमे ताजे फल रखे ..और उस घर के दरवाजे पर घंटी बजायी….
उस घर के लोग बेचैन हो गये.
और वो सोचने लगे कि वह उनसे सुबह की घटना के लिये लडने आया है..
अतः वे पहले ही तैयार हो गये और बुरा भला बोलने लगे..
मगर जैसे ही उन्होने दरवाजा खोला……वे हैरान हो गये…रसीले ताजे फलों की भरी बाल्टी के साथ…मुस्कान चेहरे पर लिये नया पडोसी सामने खडा था…
………सब हैरान थे……..

उसने कहा….जो मेरे पास था वही मैं आपके लिये ला सका…

सच है जिसके पास जो है वही वह दूसरे को दे सकता है…
जरा सोचिये…कि मेरे पास दूसरो के लिये क्या है….
………..

12507477_481977192010926_9111220816088529747_n
प्यार बांटो प्यार मिलेगा,

खुशी बांटो खुशी मिलेगी…